FeedCluster.com - Free Community Aggregators, Blog Aggregator Hosting Create Aggregator | Submit Blog | Log In
कविताओं, गज़लों और गीतों का संकलन
My 61st Birthday
GAZALNUMA GEET-QUAFAN-कफ़न । [read more]
ये मेरा तुम्हारा.........
ये मेरा तुम्हारा मधुर  मिलन  [read more]
आख़िर ऐसा क्यों हुआ ...............
उसका नाम था अनुपमा , देखने में आकर्षक व्यक्तिव और उम्र लगभग चालीस साल परिवार  के नाम पर दो बच्चे और पति ।वह एक निजी कंपनी में स्टेनो के पद पर कार्य करती थी । उसके पति एक कंपनी में इंजिनियर थे ।अच्छा वेतन, कोठी, कार,या यूँ कहें की खुश  ... [read more]
क्यों नपुंसक हो गयी हैं आंधियाँ
कहाँ जाने खो गयी हैं आँधियाँ क्यों नपुंसक हो गयी हैं आंधियाँ [read more]
शुक्र है कि टौमी बच गया ....(लघुकथा)
चमचमाती कार बंगले  के अन्दर तेज़ गति से घुसी और अचानक ही ड्राइवर ने  ब्रेक लगा  कर कार रोक दी क्योंकि कार के आगे साहेब का विदेशी कुत्ता टौमी आ गया था । ड्राइवर ने किसी तरह टौमी को बचा दिया ।मगर इस हादसे में घर में काम करने वाली  आया ... [read more]
ये धूप की बेला
ये धूप की बेला  [read more]
यूँही नहीं कविता जन्म लेती ......
ठेस जब भी कोई  मैंने दिल पे खाई हैं । दर्द के बदले मेरी , कविता निकल कर आयी हैं । [read more]
कश्ती दरिया में
कश्ती दरिया में इतराए ये समझकर [read more]
hindihindi.in.divyanarmada: दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ --संजीव 'सलिल'
hindihindi.in.divyanarmada: दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ --संजीव 'सलिल': दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ संजीव 'सलिल' * शब्दों से खिलवाड़ का, लाइलाज है रोग.. कहें 'स्टेशन' आ गया, आते-जाते लोग. * 'पौधा... [read more]
आपकी फ़रमाइश पर ....(.चंद शेर)
मेरी पिछली पोस्ट  आदत .. (मतला और एक शेर पर )पर आदरणीय रविकर फैजाबादी ने टिपण्णी में कहा था दो शेर और जोड़िये तो आज उनके आदेश का पालन कर रहा हूँ । यह पोस्ट उन्ही के नाम ........ [read more]
लिखना बाकी है
शब्दों के नर्तन से शापित अंतर्मन शिथिलाया लिखने को तो बहुत लिखा पर कुछ लिखना बाकी है [read more]
मैन इज सोशल ए एनीमल.....
मैन इज सोशल ए एनीमल यह पंक्तियाँ आजकल मुझे अक्सर याद आतीं हैं और किसी   हद तक बहुत सार्थक प्रतीत होती हैं इसकी एक छोटी से बानगी यहाँ देखिये । [read more]
आदत........(मतला और एक शेर)
 किसी की मौत पर बहाने के लिए,  दो आंसू कहाँ से लाऊं मैं।   मुझको तो आंसूओं को पीने की ,  आदत जो पड़ गयी हैं । [read more]
ब्लोगजगत में मेरी दूसरी वर्षगांठ ....
जी हाँ आज मैंने ब्लोगिंग के दो वर्ष पूरे  कर लिए ,यह दो वर्ष कैसे बीते इसका पता ही नहीं चला । लिखना, पढ़ना और टिपियाना यही क्रम चलता रहा । कभी कभी अच्छी पंक्तियाँ, सुंदर अभिव्यक्ति ,बहुत खूब, मजेदार जैसी टिपण्णी करते करते ऊब जाता था मगर ... [read more]
विचारों का बादल...
विचारों का बादल उमड़ते घुमड़ते आ ही जाते है शब्द जाल के उधेड़ बुन में जकड़ ही जाते है व्याकरण की चाशनी में डूब ही जाती है वर्ण-छंद के लय ताल में पिरो दी जाती है [read more]
गर्मी की छुट्टी ....(.बाल कविता)
लो हुई छुटियाँ बंद स्कुल  चिंटू अब  है बिलकुल कूल [read more]
शेर के साथ शरारत . ...
आज मै   आपके  सामने कुछ शेर ऐसे पेश कर रहा हूँ जिनके साथ शरारत की गयी है । [read more]
ख़ता
उसकी इस ख़ता की भी कोई सज़ा नहीं   [read more]
मेरी पुरानी कविताओं से .......
ऐसे उदास नज़रों से  न देखो [read more]
कैक्टस गुलाब और गुलाब जामुन
लव गुरु से किसी चेले ने पूछा एक दिन गुरु नारियों के भेद आज बतलाइए कैसे किस नज़र से देखे कोई कामिनी को सार सूत्र सुगम सकल समझाइए [read more]
एक रोआई वाला सपना
आज मरने के अट्ठारह साल बाद [read more]
असफल प्रयास.......
आँखों से छलका । एक आंसू , पलकों ने किया  असफल प्रयास गिरने से, रोकने का । बचाने का ,  उसके अस्तिव को  । अंतत  , वह गिर गया  । संवेदनहीनता की , रेतीली ज़मीन पर।   [read more]
सफ़र
हयात-ए-ग़म का ये सफर नहीं आसान मेरे यार,  यहाँ आएंगे अभी और भी तूफान मेरे यार |  [read more]
एक लघुकथा
किसी कहानी के लिए  ,कथानक ,संवाद  भाषाशैली , पात्र चरित्रचित्रण ,देशकाल एवं वातावरण तत्वों का होना आवश्यक है । शायद यह सबसे छोटी कहानी होगी । [read more]
जिंदगीनामा
कई तहों में  ज़िन्दगी सिमटती चली जाती है  [read more]
पेट की तपिश
ठंडे चूल्हे ने , मुस्कराते हुए ख़ाली पतीली से पूछा ? आज कब आओगी । और  क्या पकाओगी ? और सूखी लकड़ियों ने ख़ुशी मनाई । आज वह जलने से , बच गयीं  । पतीली ने मेरी तरफ, शरमाते हुए देखा । और आ  लगी मेरे जलते हुए पेट से । [read more]
गुजारिश
बेशक गुज़रो मेरी गली से, मगर नकाब ओढ़ के |  न गिराओ किसी पर बर्क-ए-हुस्न मुझे छोड़ के | [read more]
देखूं जो तुमको भांग  पीके ...
देखूं जो तुमको भांग  पीके अबीर गुलाल लगें सब फ़ीके [read more]
हर पल
हर पल बेहतर था तेरे आने पर  [read more]
इम्तिहाँ
तू असलियत में क्या है, आज देख लेते हैं । तू है पत्थर या खुदा है, आज देख लेते हैं । [read more]