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May 16, 2012
| Author: Markand Dave
| Source: M.K.TVFilms
GAZALNUMA GEET-QUAFAN-कफ़न ।
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May 11, 2012
| Author: ana
| Source: कविता
ये मेरा तुम्हारा मधुर मिलन
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May 8, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
उसका नाम था अनुपमा , देखने में आकर्षक व्यक्तिव और उम्र लगभग चालीस साल परिवार
के नाम पर दो बच्चे और पति ।वह एक निजी कंपनी में स्टेनो के पद पर कार्य करती थी ।
उसके पति एक कंपनी में इंजिनियर थे ।अच्छा वेतन, कोठी, कार,या यूँ कहें की खुश ...
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May 2, 2012
| Author: Padm Singh
| Source: ढिबरी: कविता
कहाँ जाने खो गयी हैं आँधियाँ
क्यों नपुंसक हो गयी हैं आंधियाँ
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May 1, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
चमचमाती कार बंगले के अन्दर तेज़ गति से घुसी और अचानक ही ड्राइवर ने ब्रेक लगा
कर कार रोक दी क्योंकि कार के आगे साहेब का विदेशी कुत्ता टौमी आ गया था ।
ड्राइवर ने किसी तरह टौमी को बचा दिया ।मगर इस हादसे में घर में काम करने वाली
आया ...
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Apr 27, 2012
| Author: ana
| Source: कविता
ये धूप की बेला
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Apr 26, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
ठेस जब भी कोई
मैंने दिल पे खाई हैं ।
दर्द के बदले मेरी ,
कविता निकल कर आयी हैं ।
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Apr 22, 2012
| Author: ana
| Source: कविता
कश्ती दरिया में इतराए ये समझकर
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Apr 21, 2012
| Author: sanjiv verma
| Source: हिन्द-युग्म Hindi Kavita
hindihindi.in.divyanarmada: दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ --संजीव 'सलिल': दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ संजीव 'सलिल' * शब्दों से खिलवाड़ का, लाइलाज है रोग.. कहें 'स्टेशन' आ गया, आते-जाते लोग. * 'पौधा...
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Apr 20, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
मेरी पिछली पोस्ट आदत .. (मतला और एक शेर पर )पर आदरणीय रविकर फैजाबादी ने
टिपण्णी में कहा था दो शेर और जोड़िये तो आज उनके आदेश का पालन कर रहा हूँ ।
यह पोस्ट उन्ही के नाम ........
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Apr 20, 2012
| Author: Harihar
| Source: हिन्द-युग्म Hindi Kavita
शब्दों के नर्तन से शापित
अंतर्मन शिथिलाया
लिखने को तो बहुत लिखा
पर कुछ लिखना बाकी है
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Apr 16, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
मैन इज सोशल ए एनीमल यह पंक्तियाँ आजकल मुझे अक्सर याद आतीं हैं और किसी
हद तक बहुत सार्थक प्रतीत होती हैं इसकी एक छोटी से बानगी यहाँ देखिये ।
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Apr 10, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
किसी की मौत पर बहाने के लिए,
दो आंसू कहाँ से लाऊं मैं।
मुझको तो आंसूओं को पीने की ,
आदत जो पड़ गयी हैं ।
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Apr 5, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
जी हाँ आज मैंने ब्लोगिंग के दो वर्ष पूरे कर लिए ,यह दो वर्ष कैसे बीते इसका पता ही नहीं चला । लिखना, पढ़ना और टिपियाना यही क्रम चलता रहा । कभी कभी अच्छी पंक्तियाँ, सुंदर अभिव्यक्ति ,बहुत खूब, मजेदार जैसी टिपण्णी करते करते ऊब जाता था मगर ...
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Mar 31, 2012
| Author: ana
| Source: कविता
विचारों का बादल उमड़ते घुमड़ते आ ही जाते है
शब्द जाल के उधेड़ बुन में जकड़ ही जाते है
व्याकरण की चाशनी में डूब ही जाती है
वर्ण-छंद के लय ताल में पिरो दी जाती है
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Mar 30, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
लो हुई छुटियाँ बंद स्कुल
चिंटू अब है बिलकुल कूल
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Mar 27, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
आज मै आपके सामने कुछ शेर ऐसे पेश कर रहा हूँ जिनके साथ शरारत की गयी है ।
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Mar 25, 2012
| Author: S.VIKRAM
| Source: आरंभन
उसकी इस ख़ता की भी कोई सज़ा नहीं
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Mar 25, 2012
| Author: ana
| Source: कविता
ऐसे उदास नज़रों से न देखो
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Mar 24, 2012
| Author: Padm Singh
| Source: ढिबरी: कविता
लव गुरु से किसी चेले ने पूछा एक दिन
गुरु नारियों के भेद आज बतलाइए
कैसे किस नज़र से देखे कोई कामिनी को
सार सूत्र सुगम सकल समझाइए
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Mar 21, 2012
| Author: मनीष वंदेमातरम्
| Source: हिन्द-युग्म Hindi Kavita
आज मरने के अट्ठारह साल बाद
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Mar 21, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
आँखों से छलका ।
एक आंसू ,
पलकों ने किया
असफल प्रयास
गिरने से, रोकने का ।
बचाने का ,
उसके अस्तिव को ।
अंतत ,
वह गिर गया ।
संवेदनहीनता की ,
रेतीली ज़मीन पर।
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Mar 18, 2012
| Author: S.VIKRAM
| Source: आरंभन
हयात-ए-ग़म का ये सफर नहीं आसान मेरे यार,
यहाँ आएंगे अभी और भी तूफान मेरे यार |
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Mar 15, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
किसी कहानी के लिए ,कथानक ,संवाद भाषाशैली , पात्र चरित्रचित्रण ,देशकाल एवं वातावरण तत्वों का होना आवश्यक है । शायद यह सबसे छोटी कहानी होगी ।
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Mar 13, 2012
| Author: ana
| Source: कविता
कई तहों में ज़िन्दगी सिमटती चली जाती है
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Mar 10, 2012
| Author: Sunil Kumar
| Source: दिल की बातें
ठंडे चूल्हे ने ,
मुस्कराते हुए
ख़ाली पतीली से पूछा ?
आज कब आओगी ।
और क्या पकाओगी ?
और सूखी लकड़ियों ने
ख़ुशी मनाई ।
आज वह जलने से ,
बच गयीं ।
पतीली ने मेरी तरफ,
शरमाते हुए देखा ।
और आ लगी
मेरे जलते हुए पेट से ।
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Mar 5, 2012
| Author: S.VIKRAM
| Source: आरंभन
बेशक गुज़रो मेरी गली से, मगर नकाब ओढ़ के |
न गिराओ किसी पर बर्क-ए-हुस्न मुझे छोड़ के |
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Mar 4, 2012
| Author: shyam skha
| Source: हिन्द-युग्म Hindi Kavita
देखूं जो तुमको भांग पीके
अबीर गुलाल लगें सब फ़ीके
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Mar 4, 2012
| Author: ana
| Source: कविता
हर पल बेहतर था तेरे आने पर
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Mar 3, 2012
| Author: S.VIKRAM
| Source: आरंभन
तू असलियत में क्या है, आज देख लेते हैं ।
तू है पत्थर या खुदा है, आज देख लेते हैं ।
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